
डॉ. प्रिंस दीप खटीक
विकास को तीव्र गति के साथ सरकार ने संसद में विकासोन्मुख केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया, जिसमें आर्थिक मजबूती, सामाजिक समावेशन और भविष्य की तैयारी को प्राथमिकता दी गई है। यह बजट गरीब, युवा, किसान, महिला और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है।
सरकार ने वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में ₹12.2 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो अब तक का एक बड़ा आवंटन है। इससे सड़क, रेल, जलमार्ग, ऊर्जा, आवास और शहरी अवसंरचना परियोजनाओं को गति मिलेगी तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
राज्यों के लिए ₹1.4 लाख करोड़ का विशेष अनुदान रखा गया है, जिससे सहकारी संघवाद को मजबूती मिलेगी और राज्यों में स्थानीय विकास कार्यों को बल मिलेगा। साथ ही सरकार ने राजकोषीय घाटे को GDP के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, जो वित्तीय अनुशासन और अर्थव्यवस्था की स्थिरता को दर्शाता है।
बजट में उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण फंडों की घोषणा की गई है।
🔹 बायोफार्मा शक्ति योजना के अंतर्गत ₹10,000 करोड़ का प्रावधान कर भारत को वैश्विक जैव-फार्मा हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
🔹 एमएसएमई ग्रोथ फंड के जरिए छोटे और मध्यम उद्योगों को पूंजी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
🔹 अवसंरचना परियोजनाओं के लिए जोखिम गारंटी फंड की व्यवस्था कर निजी निवेश को प्रोत्साहित किया गया है।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी बड़े निवेश किए गए हैं। आधुनिक तकनीकी शिक्षा, एनीमेशन-गेमिंग जैसे नए क्षेत्रों तथा महिला छात्रावासों की स्थापना से युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है।
कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं खेल, पर्यटन और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश से भारत की वैश्विक पहचान को मजबूती मिलेगी।
निष्कर्षतः, यह बजट बड़े फंड आवंटनों के साथ आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और भविष्य की तैयारी का संतुलित दस्तावेज है, जो देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करता है।


